इन अमीर देशों ने खरीद लिए कोरोना वैक्सीन के 50% से ज्यादा डोज, अब भारत को मिलना मुश्किल

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पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस की वैक्सीन के लिए परेशान है. ऐसे आपको पता चले कि आपके हिस्से की वैक्सीन अगर किसी अमीर देश ने जमा करके रख ली है तो आप क्या करेंगे.  

वैसे तो अब तक दुनिया में कोरोना की कोई कारगर वैक्सीन नहीं आई है लेकिन इसके पहले ही भारत जैसे गरीब देशों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है.

जी हां,  पूरी दुनिया की कुल 13 फीसदी आबादी वाले अमीर देशों ने कोविड-19 वैक्सीन के 50 फीसदी से ज्यादा हिस्से को खरीद कर अपने स्टॉक में रख लिया है. अमीर देशों ने वैक्सीन पर काम कर रही कंपनियों के साथ मिलकर कई समझौते और व्यापारिक सौदे किए हैं. एनालिटिक्स कंपनी एयरफिनिटी द्वारा जमा किए डेटा के अनुसार ट्रायल्स के अंतिम दौर से गुजर रही 5 वैक्सीन के साथ करार किए गए हैं.

9 देशों ने खरीद लिए 50% कोरोना वैक्सीन डोज

अंतरराष्ट्रीय संस्था ऑक्सफैम और नेचर पत्रिका के मुताबिक 15 सितम्बर तक दुनिया के अमीर देशों ने कोरोना वैक्सीन बना रही छह कंपनियों से 2 अरब से ज्यादा डोज खरीद लिए हैं. अकेले ब्रिटेन ने तो अपने हर नागरिक के लिए 5 वैक्सीन की खरीद की है. इसके अलावा यूरोपियन यूनियन के देश सामूहिक रूप से कोरोना की वैक्सीन खरीद रहे हैं. जापान ने भी पहले ही कोरोना वैक्सीन का बड़ा ऑर्डर कर रखा है. वहीँ अमीर देशों द्वारा वैक्सीन पर कब्जे की इस होड़ पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जताई है लेकिन लगता नहीं की वो कुछ कर पायेगी|

Rich countries stock half Coronavirus vaccines in the world

ऑक्सफैम ने एस्ट्राजेनेका, गामालेया-स्पुतनिक, मॉडर्ना, फाइजर और साइनोवैक वैक्सीन का अध्ययन किया है और ये वो वैक्सींस हैं जिनसे दुनिया को सबसे ज्यादा उम्मीद है| ये पांचों कंपनियां मिलकर कुल 590 करोड़ डोज बनाने की क्षमता रखती हैं जो की 300 करोड़ लोगों के लिए पर्याप्त वैक्सीन है. क्योंकि हर इंसान को कोरोना वैक्सीन की दो डोज दी जाएंगी.

किन-किन देशों ने खरीद ली कोरोना वैक्सीन?

इन पांचों दवा कंपनियों के साथ कई देशों ने वैक्सीन बनने से पहले ही कई समझौते कर लिए हैं. अमीर देशों ने इन कंपनियों की कुल क्षमता के 50 फीसदी से ज्यादा डोज यानि 270 करोड़ डोज खरीद कर स्टॉक करने का प्लान बनाया है. इन देशो में अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन, ऑस्ट्रेलिया, हॉन्गकॉन्ग, मकाऊ, जापान, स्विट्जरलैंड और इजरायल शामिल है. यानी कोरोना वैक्सीन के अमीर देशों ने खरीद लिए हैं. इन अमीर देशों में दुनिया की सिर्फ 13 प्रतिशत आबादी रहती है. यानी दुनिया के बाकी देशों को वैक्सीन मिलने में दिक्कत हो सकती है.

बाकी बची हुई 260 करोड़ डोज को भारत, बांग्लादेश, चीन, ब्राजील, इंडोनेशिया और मेक्सिको में बेचा जाएगा. ताकि इन विकासशील देशों में भी लोगों को कोरोना से बचाया जा सके.

कब तक आ जाएगी कोरोना वायरस वैक्सीन?

न्यूज़ रिपोर्ट्स के अनुसार ऑक्सफोर्ड और आस्ट्रा जेनिका का कोरोना वैक्सीन सबसे पहले आने की संभावना है. ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन अभी ह्यूमन ट्रायल के तीसरे चरण में है लेकिन अभी इसके बाज़ार में आने में कम से कम २-3 महीने का समय लग सकता है|

Corona Virus vaccine Donald Trump America

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो बहुत जल्द कोरोना वैक्सीन बाजार में उतारने वाले हैं. हो सकता है कि अगले महीने ही वैक्सीन लॉन्च कर दिया जाए. हालांकि अतंरराष्ट्रीय स्तर पर सभी को ये पता है कि WHO कह चुका है कि सही और क्षमतायुक्त वैक्सीन अगले साल के मध्य तक ही आ पाएगी.

क्या जिंदगी बचाने वाली वैक्सीन की पहुंच इस बात पर तय होगी कि आप कहां रहते हैं और आपके पास कितना पैसा है. एक सुरक्षित और असरदार वैक्सीन का बनाया जाना बहुत जरूरी है. लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि वह दुनिया के अमीर हो या गरीब हर इंसान तक पहुंच सके. ये वैक्सीन सभी के लिए उपलब्ध हों. सस्ती हों और आसानी से मिल सके.

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